Tag - का

भारत का संछिप्त इतिहास

  भारत का संछिप्त इतिहास यहाँ पर सम्पूर्ण भारत का संछिप्त इतिहास का संकलन दिया जा रहा है जो की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा में सामान्यत: पूछे जाते है जो की कम समय में  “भारत का संछिप्त इतिहास”  रिविजन किया जा सकता है | 563 : गौतम बुद्ध [...]

धन का बहिर्गमन (Drain of Wealth)

  धन का बहिर्गमन (Drain of Wealth) इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि उपर्युक्त सभी व्यवस्थाओं के मूल में कम्पनी की वाणिज्य वादी प्रकृति व्याप्त थी। धन की निकासी की अवधारणा वाणिज्यवादी सोच के क्रम में विकसित हुई। अन्य शब्दों में, वाणिज्यवादी व्यवस्था [...]

भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन (Arrival of European Companies in India)

  भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन (Arrival of European Companies in India) यूरोप के साथ भारत के व्यापारिक सम्बन्ध बहुत पुराने, यूनानियों के जमाने से है। भारत-यूरोपीय व्यापारिक मार्ग जहां से भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन (Arrival of European Companies in India) हुआ | प्रायः तीन [...]

सिखों का इतिहास

  सिखों का इतिहास सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक थे। सिखों में कुल 10 शिख गुरु हुए जिनका इतिहास निम्नलिखित है। गुरु नानक (1469-1539) जन्म:-तलबड़ी (वर्तमान ननकाना साहिब) मृत्यु:-करतारपुर (डेरा बाबा) पिता का नाम:-कालू जी माता का नाम:-तृप्ता पत्नी का नाम:-सुलक्षणी जाति:- खत्री उपाधि:- हजरत रब्बुल मजीज सिखों के पहले गुरु गुरुनानक थे, इन्होंने नानक [...]

यूरोपीय कम्पनियों का आगमन-पुर्तगीज,डच,अंग्रेज,डेनिश,फ्रांसीसी

  यूरोपीय कम्पनियों का आगमन 15वीं शताब्दी से लेकर 17वीं शताब्दी के बीच निम्नलिखित यूरोपीय कम्पनियाँ क्रमशः भारत आयी- पुर्तगीज, डच, अंग्रेज, डेनिश, फ्रांसीसी। परन्तु इन कम्पनियों के स्थापना का क्रम थोड़ा सा भिन्न था। ये निम्नलिखित क्रम में स्थापित हुई- पुर्तगीज-अंग्रेज-डच-डेनिश-फ्रांसीसी।  पुर्तगीज सबसे पहले भारत पहुँचे, बाकी सभी कम्पनियाँ [...]

स्वतन्त्र राज्यों का उत्थान

  हैदराबाद संस्थापकः–निजामुलमुल्क अथवा बिनकिलिस खाँ समय:-1724 मुहम्मद शाह के समय में सर्वप्रथम हैदराबाद के स्वतन्त्र राज्य की नींव निजामुलमुल्क ने रखी वह दिल्ली दरबार के षडयंत्रों के वातावरण से क्षुब्ध था अतः शिकार के बहाने दक्षिण गया और हैदराबाद राज्य की स्थापना की। मुहम्मद शाह ने मुबारिस्ता [...]

मराठा साम्राज्य-पेशवाओं का उत्थान

  पेशवाओं का उत्थान शाहू के समय में पेशवाओं का पुनः उत्थान हुआ। धीरे-धीरे वे ही मराठा राज्य के सर्वेसर्वा बन गये। बाला जी विश्वनाथ’’ (1713-20) बाला जी विश्वनाथ मराठा साम्राज्य के द्वितीय संस्थापक माने जाते हैं। इन्हीं के साथ में पेशवा का पद आनुवंशिक हो गया। बाला [...]

भारत पर अरबों का आक्रमण: ऐतिहासिक महत्व,तुर्को का आगमन

  भारत पर अरबों का आक्रमण: ऐतिहासिक महत्व भारत और अरब के बीच 7वीं सदी में ही संपर्क आरंभ हो गये थे। लेकिन राजनीतिक संबंध 712 ई0 में सिंध पर आक्रमण के दौरान स्थापित हुआ। भारत में अरबों के आगमन का राजनीतिक दृष्टि से उतना महत्व [...]

कन्नौज के गहड़वाल,गुजरात का चालुक्य,कल्याणी के उत्तर कालीन पश्चिमी चालुक्य,हिन्दू शाही वंश,कश्मीर का इतिहास,कारकोट वंश,उत्पल वंश,लोहर वंश,देवगिरि के यादव,द्वारसमुद्र के होयसल,कदम्ब वंश

  ’कन्नौज के गहड़वाल’ संस्थापक- चन्द्रदेव   राजधानी:- कन्नौज गुर्जर प्रतिहारों के पतन के बाद चन्द्रदेव ने कन्नौज में गहड़वाल वंश की स्थापना 1090 ई0 में की। गहड़वाल शासकों को काशी नरेश के नाम से भी जाना जाता था। इस वंश का पहला प्रसिद्ध शासक गोविन्द चन्द्र हुआ। गोविन्द चन्द्र [...]

मगध राज्य का उत्कर्ष,हर्यक वंश,शिशुनाग वंश,नन्द वंश

सोलह महाजनपदों में मुख्य प्रतिद्वन्दिता मगध और अवन्ति के बीच में थी इनमें भी अन्तिम विजय मगध को मिली। क्योंकि उसके पास अनेक योग्य शासक (बिम्बिसार, अजातशत्रु आदि) थे। लोहे की खान भी मगध में थी हलाँकि अवन्ति के पास भी लोहे के भण्डार [...]

सिंधु घाटी सभ्यता के समय धार्मिक दशा एवं सिंधु घाटी सभ्यता का पतन

  धार्मिक दशा:-हड़प्पा के लोग एक ईश्वरीय शक्ति में विश्वास करते थे जिसके दो रूप में परम पुरुष एवं परम नारी इस द्वन्दात्मक धर्म का उन्होंने विकास किया धर्म का यह रुप आज भी हिन्दू समाज के विद्यमान है। 1-शिव की पूजा:-मोहनजोदड़ों से मैके को एक [...]