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भारतीय संघ व्यवस्था

भारतीय संघ व्यवस्था के संविधान द्वारा क्षेत्र के आधार पर शक्तियों का जो विभाजन या केन्द्रीकरण किया जाता है उस दृष्टि से दो प्रकार की शासन व्यवस्थाएं होती हैं: एकात्मक शासन और संघात्मक शासन। भारत क्षेत्र और जनसंख्या की दृष्टि से अत्यधिक विशाल और [...]

राज्य के नीति निदेशक तत्व [DIRECTIVE PRINCIPLES OF STATE POLICY]

हमारे संविधान की एक प्रमुख विशेषता नीति निर्देशक तत्व हैं। विश्व के अन्य देशों के संविधानों में आयरलैण्ड के संविधान को छोड़कर अन्य किसी देश के संविधान में इस प्रकार के तत्व नहीं हैं। भारतीय संविधान के निर्माताओं ने संविधान में केवल राज्य के [...]

मूल अधिकार

मूल अधिकारों की आवश्यकता और महत्व:-व्यक्ति और राज्य के आपसी सम्बन्धों की समस्या सदैव से ही बहुत अधिक जटिल रही है और वर्तमान समय की प्रजातन्त्रीय व्यवस्था में इस समस्या ने विशेष महत्व प्राप्त कर लिया है। यदि एक ओर शान्ति तथा व्यवस्था बनाये [...]

भारतीय नागरिकता

नागरिकता मनुष्य की उस स्थिति का नाम है, जिसमें मनुष्य को नागरिक का स्तर प्राप्त होता है और नागरिक केवल ऐसे ही व्यक्तियों को कहा जा सकता है जिन्हें राज्य की ओर से सभी राजनीतिक और नागरिक अधिकार प्रदान किये गये हों, और जो [...]

संविधान की अनुसूचियां

संविधान की अनुसूचियां भारतीय संविधान के मूल पाठ में 8 अनुसूचियां थी, लेकिन वर्तमान समय में भारतीय संविधान में 12अनुसूचियां हैं।  अग्र वर्तमान में संविधान की अनुसूचियां प्रकार है: प्रथम अनुसूची:-इसमें भारतीय संघ के घटक राज्यों और संघ शासित क्षेत्रोंका उल्लेख है। द्वितीय अनुसूची:-इसमें भारतीय राज-व्यवस्था के [...]

राजपूत युग,प्रतिहार वंश,राष्ट्रकूट वंश,पालवंश

  राजपूत युग (7 या 8वीं शताब्दी) राजपूत शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम कर्नल टाड़ ने आठवीं शताब्दी में लिखी एक पुस्तक Annals and History Rajsthan  में किया है। राजपूत शब्द एक जाति के रूप में अरब आक्रमण के बाद ही प्रचलित हुआ। भारतीय इतिहास में 7वीं [...]