Warning: Parameter 1 to wp_default_styles() expected to be a reference, value given in /home/anubhav1994/public_html/mpstudy.com/wp-includes/plugin.php on line 601

Warning: Parameter 1 to wp_default_scripts() expected to be a reference, value given in /home/anubhav1994/public_html/mpstudy.com/wp-includes/plugin.php on line 601
Modern History Archives - MP Study
Warning: Cannot assign an empty string to a string offset in /home/anubhav1994/public_html/mpstudy.com/wp-includes/class.wp-scripts.php on line 447

Modern History

धन का बहिर्गमन (Drain of Wealth)

  धन का बहिर्गमन (Drain of Wealth) इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि उपर्युक्त सभी व्यवस्थाओं के मूल में कम्पनी की वाणिज्य वादी प्रकृति व्याप्त थी। धन की निकासी की अवधारणा वाणिज्यवादी सोच के क्रम में विकसित हुई। अन्य शब्दों में, वाणिज्यवादी व्यवस्था [...]

भारत में अंग्रेजों की भू-राजस्व व्यवस्था (British Land Revenue System in India),स्थायी भू-राजसव व्यवस्था (इस्तमरारी बंदोबस्त)(Permanent Land Revenue System) :-

  भारत में अंग्रेजों की भू-राजस्व व्यवस्था (British Land Revenue System in India),स्थायी भू-राजसव व्यवस्था (इस्तमरारी बंदोबस्त)(Permanent Land Revenue System) :- कंपनी के अंतर्गत बंगाल में भू-राजस्व (Revenue System)के निर्धारण का प्रश्न खड़ा हुआ, जब ब्रिटिश कंपनी को बंगाल की दीवानी प्राप्त हुई। आरम्भ में लाॅर्ड [...]

British Policy towards Princely States

  देशी रियासतों के प्रति ब्रिटिश नीति (British Policy towards Princely States) यद्यपि ब्रिटिश शासन की रियासतों के प्रति कोई निश्चित नीति नहीं थी, तथापि उन्होंने देश, कारक व परिस्थिति के अनुसार राजनैतिक सर्वोच्चता को प्राप्त करने के लिए विभिन्न प्रकार की नीतियों का अनुसरण किया। [...]

सहायक संधि प्रणाली और भारत पर इसका प्रभाव

  सहायक संधि प्रणाली और भारत पर इसका प्रभाव साम्राज्यवादी विचारधारा का पोषक लार्ड बेलेजली1798 में भारत का गर्वनर जनरल बना। उसके पद प्राप्ति के समय भारत की राजनीतिक स्थिति अत्यंत संकट पूर्ण थी। शोर की अहस्तक्षेप की नीति के कारण कम्पनी कई खतरों से [...]

औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था

  औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था से तात्पर्य है कि किसी दूसरे देश की अर्थव्यवस्था का उपयोग अपने हित के लिए प्रयोग करना। भारत में औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था की शुरुआत 1757 ई0 में प्लासी युद्ध से हुई, जो विभिन्न चरणों में अपने बदलते स्वरूप के साथ स्वतंत्रता प्राप्ति [...]

भारत में अंग्रेजों की कम्पनी की स्थापना (Establishment of the British company in India)

  भारत में अंग्रेजों की कम्पनी की स्थापना (Establishment of the British company in India) 31 दिसम्बर 1600 को ब्रिटेन की महारानी एलिजावेथ प्रथम ने एक अंग्रेज कम्पनी को 15 वर्ष के लिए पूर्व के साथ व्यापार करने की अनुमति प्रदान की। इस कम्पनी का प्रारम्भिक [...]

भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन (Arrival of European Companies in India)

  भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन (Arrival of European Companies in India) यूरोप के साथ भारत के व्यापारिक सम्बन्ध बहुत पुराने, यूनानियों के जमाने से है। भारत-यूरोपीय व्यापारिक मार्ग जहां से भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन (Arrival of European Companies in India) हुआ | प्रायः तीन [...]