Ancient History

कन्नौज के गहड़वाल,गुजरात का चालुक्य,कल्याणी के उत्तर कालीन पश्चिमी चालुक्य,हिन्दू शाही वंश,कश्मीर का इतिहास,कारकोट वंश,उत्पल वंश,लोहर वंश,देवगिरि के यादव,द्वारसमुद्र के होयसल,कदम्ब वंश

  ’कन्नौज के गहड़वाल’ संस्थापक- चन्द्रदेव   राजधानी:- कन्नौज गुर्जर प्रतिहारों के पतन के बाद चन्द्रदेव ने कन्नौज में गहड़वाल वंश की स्थापना 1090 ई0 में की। गहड़वाल शासकों को काशी नरेश के नाम से भी जाना जाता था। इस वंश का पहला प्रसिद्ध शासक गोविन्द चन्द्र हुआ। गोविन्द चन्द्र [...]

दिल्ली तथा अजमेर के चैहान,चंदेल वंश (बुन्देल खण्ड),परमार वंश,कलचुरिवंश,सेनवंश

  ’’दिल्ली तथा अजमेर के चैहान’ संस्थापक:- वासुदेव (सातवीं शताब्दी) राजधानी– शाकंभरी (अजमेर) एवं दिल्ली चैहान ने अपना मूल केन्द्र अजमेर व दिल्ली को बनाया लेकिन बाद में उन्होंने अपनी राजधानी दिल्ली में ही स्थानान्तरित कर ली। अजमेर:– इसका प्रारम्भिक नाम शाकंभरी था। अजयराज नामक शासक ने अजमेर [...]

गुप्त साम्राज्य के अन्तर्गत प्रशासन,अर्थव्यवस्था,साहित्य,कला,धार्मिक जीवन

  गुप्त साम्राज्य के अन्तर्गत प्रशासन (Administration Under Gupta Dynasty) : गुप्तकालीन शासकों ने एक विशाल साम्राज्य का निर्माण किया था। पाटलिपुत्र इस विशाल साम्राज्य की राजधानी थी। गुप्त शासकों ने उन क्षेत्रों के प्रशासन में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जहाँ के शासकों ने उनके सामन्तीय [...]

गुप्त साम्राज्य

  Gupta Dynasty    चैथी सदी ई0 के प्रारम्भ में भारत में कोई बड़ा संगठित राज्य अस्तित्व में नहीं था। यद्यपि कुषाण एवं शक शासकों का शासन चैथी सदी ई0 के प्रारंभिक वर्षों तक जारी रहा, लेकिन उनकी शक्ति काफी कमजोर हो गयी थी और सातवाहन [...]

मौर्याेत्तरकालीन राजव्यवस्था,समाज,अर्थव्यवस्था,कृषि,उद्योग,कला,व्यापार,साहित्य

  मौर्याेत्तरकालीन राजव्यवस्था एवं प्रशासन (Post-Mauryan Polity and Administration) इस काल में अधिकतर छोटे-छोटे राज्य थे। यद्यपि उत्तर में कुषाणों एवं दक्षिण में सातवाहनों ने काफी विस्तृत प्रदेशों पर राज किया किन्तु न तो सातवाहन और न तो कुषाणों के राजनीतिक संगठन में वह केन्द्रीयकरण [...]

मौर्योत्तर काल

मौर्य साम्राज्य के पतन के साथ ही भारतीय इतिहास की राजनीतिक एकता कुछ समय के लिए विखंडित हो गई। अब ऐसा कोई राजवंश नहीं था जो हिंदुकुश से लेकर कर्नाटक एवं बंगाल तक आधिपत्य स्थापित कर सके। दक्षिण में स्थानीय शासक स्वतंत्र हो उठे। [...]

मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था,कला,समाज,अर्थव्यवस्था एंव पतन

  मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था:- मौर्य साम्राज्य के प्रशासन का स्वरूप केन्द्रीकृत था। अर्थशास्त्र के आधार पर प्रशासन के सभी पहलूओं में राजा का विचार और आदेश सबसे ऊपर था। चाणक्य के अनुसार राज्य के सात अवयव हैं- राजा, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, बल तथा [...]

मौर्य साम्राज्य-अशोक

  अशोक बिंदुसार की मृत्यु के पश्चात् उसका पुत्र अशोक मौर्य साम्राज्य की गद्दी पर बैठा। अशोक विश्व इतिहास के उन महानतम सम्राटों में अपना सर्वोपरि स्थान रखता है जिनका नाम सफलतम सम्राटों में है तथा भावी पीढि़याँ जिनका नाम श्रद्धा एवं कृतज्ञता के साथ [...]

मौर्य साम्राज्य-चन्द्रगुप्त मौर्य -बिंदुसार

  संस्थानक-चन्द्रगुप्त मौर्य कौटिल्य को भारत का मैकियावली भी कहते हैं। मैकियावली की पुस्तक का नाम The Prince है। यह इटली का था। चन्द्रगुप्त मौर्य का नाम यूनानी लेखकों ने सेन्ड्रोकोट्स के रूप में वर्णित किया है। सेन्ड्रोकोट्स की पहचान चन्द्रगुप्त से करने वाला व्यक्ति विलियम [...]

मगध राज्य का उत्कर्ष,हर्यक वंश,शिशुनाग वंश,नन्द वंश

सोलह महाजनपदों में मुख्य प्रतिद्वन्दिता मगध और अवन्ति के बीच में थी इनमें भी अन्तिम विजय मगध को मिली। क्योंकि उसके पास अनेक योग्य शासक (बिम्बिसार, अजातशत्रु आदि) थे। लोहे की खान भी मगध में थी हलाँकि अवन्ति के पास भी लोहे के भण्डार [...]

द्वितीय नगरीय क्रान्ति

  IInd Urban Revolution नगरीय क्रान्ति शब्द का उल्लेख सर्वप्रथम गार्डन चाइल्डस ने अपनी पुस्तक The Urban Revolution में किया है भारत में प्रथम नगरीय क्रान्ति सिन्धु सभ्यता के समय में हुई। छठी शताब्दी ईसा पूर्व में द्वितीय नगरीय क्रान्ति के प्रमाण मिलते हैं। गार्डन चाइल्ड [...]

महा काब्य युग,सूत्र काल,संस्कार,विवाह

  महा काब्य युग (Ebie Age) रामायण और महाभारत को आदि महाकाब्य अथवा आर्ष महाकाव्य माना जाता है इसमें महाभारत की शुरूआत पहले मानी जाती है लेकिन सर्वप्रथम रामायण पूरा हुआ। रामायण:- महर्षि बाल्मीकि द्वारा रचित भारत का आदि महाकाव्य है। प्रारम्भ में इसमें 6000 श्लोक थे [...]