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भारत के गर्वनर जनरल और वायसराय - MP Study
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भारत के गर्वनर जनरल और वायसराय

भारत के गर्वनर जनरल और वायसराय

 

भारत के गर्वनर जनरल और वायसराय

कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:-

  • बंगाल का प्रथम गर्वनर-क्लाइव।
  • आत्महत्या करने वाला प्रथम गर्वनर-क्लाइव।
  • महाभियोग का सामना करने वाला गर्वनर जनरल-वारेन हेस्टिंग्स।
  • बंगाल का प्रथम गर्वनर जनरल-वारेन हेस्टिंग्स।
  • वह गर्वनर जनरल जिसकी मजार गाजीपुर में है- कार्नवालिस।
  • 1833 के अधिनियम के द्वारा भारत का प्रथम गर्वनर जनरल -लाॅर्ड विलियम बैंटिंग
  • ब्रिटिश भारत का अन्तिम गर्वनर जनरल-माउण्ट बेटेन।
  • भारत का अन्तिम गर्वनर जनरल-श्री राजगोपालाचारी।
  • भारत का प्रथम वायसराय-लार्ड कैनिंग।
  • भारत का सबसे लोकप्रिय गर्वनर जनरल-रिपन।

बंगाल के गर्वनर

प्लासी के युद्ध में विजय के बाद क्लाइव को बंगाल का गर्वनर बनाया गया।
1. क्लाइव (1757-60):- क्लाइव की ईस्ट इंडिया कम्पनी में नियुक्ति एक क्लर्क के रूप में दक्षिण भारत में हुई थी जहाँ उसने आंग्ल फ्रांसीसी युद्ध के समय अपनी सौर्य एवं बुद्धिमत्ता का प्रदर्शन किया, फलस्वरूप उसे बंगाल में सेना नायक की हैसियत से भेजा गया। प्लासी के युद्ध में बहादुरी दिखाने के बाद उसे बंगाल का प्रथम गर्वनर बनाया गया।
2. हालवेल (1760) स्थानापन्न:- क्लाइव के वापस जाने के बाद इसे बंगाल का स्थानापन्न गर्वनर बना दिया गया। इसी ने ब्लैकहोल की घटना का वर्णन किया है।
3. बेन्सिटार्ट (1760-65 ई0):- इसके समय में बक्सर का प्रसिद्ध युद्ध हुआ।
4. क्लाइव (1765-67):- बक्सर युद्ध में अंग्रेजी विजय के बाद क्लाइव को पुनः बंगाल का गर्वनर बनाकर भेजा गया। इसने निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्य किये।

  • दीवानी की प्राप्ति:- शाह आलम-द्वितीय ने 1765 ई0 के इलाहाबाद के प्रथम सन्धि के द्वारा बंगाल बिहार और उड़ीसा की दीवानी अंग्रेजों को प्रदान की।
  • द्वैध शासन:- 1765 ई0 में बंगाल में क्लाइव ने द्वैध शासन लागू किया।
  • व्यापार समिति का गठन:- सोसायटी फार टेªड का गठन क्लाइव ने 1765 में कम्पनी के कर्मचारियों की एक व्यापार समिति बनायी इन्हें नमक सुपारी, तथा तम्बाकू के व्यापार का अधिकार दिया। 1768 में यह योजना समाप्त हो गयी।
  • श्वेत विद्रोह:– क्लाइव ने बंगाल के सैनिकों को मिलने वाला दोहरा भत्ता बन्द कर दिया। मुगेर तथा इलाहाबाद के श्वेत अधिकारियों ने क्लाइव के आज्ञा का विद्रोह किया। इसे श्वेत विदोह के नाम से जाना जाता है परन्तु इस विदोह को दबा दिया गया।

इतिहासकार पर्सिवल स्पियर ने उसे भविष्य का अग्रदूत कहा। क्लाइव ने इंग्लैण्ड में जाकर आत्महत्या कर ली।
5. वेरलेस्ट (1767-69):- द्वैध शासन के समय बंगाल का गर्वनर।
6. कर्टियर (1769-72):- द्वैध शासन इसके समय में भी जारी रहा। इसके समय में आधुनिक भारत का पहला अकाल 1770 ई0 में पड़ा।
7. वारेेेेन हेस्टिंग्स (1772-74):- यह बंगाल का अन्तिम गर्वनर था। इसने क्लाइव द्वारा स्थापित द्वैध शासन को समाप्त कर दिया।
बंगाल के गर्वनर जनरल

(1773 के रेगुलेटिंग एक्ट के द्वारा)

रेगुलेटिंग एक्ट के तहत पहली बार गर्वनर जनरल की नियुक्ति की गई। इस प्रकार भारत में प्रथम गर्वनर जनरल की नियुक्ति की गयी। इस प्रकार प्रथम भारत के गर्वनर जनरल वारेन हेस्टिंग्स को बनाया गया।

1. वारेन हेस्टिंग्स (1774-85)

 इसके काल की प्रमुख घटना निम्नलिखित है।

  • राजस्व बोर्ड का गठन:- 1772 में हेस्टिंग्स ने इसका गठन किया तथा राजस्व कोस को मुर्सिदाबाद से कलकत्ता ले आया।
  • भू-राजस्व बन्दोबस्त:– 1772 में पाँच वर्षीय और 1777 में एक वर्षीय भू-राजस्व बन्दोबस्त किया।
  • न्याय व्यवस्था की शुरुआत:– 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट के तहत 1774 में कलकत्ता में एक सुप्रीम कोर्ट की स्थापना की गयी। इसका मुख्य न्यायाधीश इम्पे था। इसके अन्य न्यायाधीश चैम्बर्स, लिमैस्टर एवं हाइड थे। इस प्रकार भारत में न्यायिक सेवा का यह जन्म दाता माना जाता है।
  • बनारस की सन्धि (1773):- इसी सन्धि से प्रेरित होकर अवध के नवाब सुजाऊद्दौला ने 1774 ई0 में रुहेल खण्ड पर अधिकार कर लिया।
  • फैजाबाद की सन्धि (1775):- इस संधि के द्वारा अवध के बेगमों की सम्पत्ति की सुरक्षा की गारण्टी दी गयी थी। तथा बनारस पर अंग्रेजी सर्वोच्चता स्वीकार कर ली गयी।
  • ऐसियाटिक सोसाइटी आॅफ बंगाल की स्थापना (1784) में विलियम जोन्स द्वारा:- इस सोसाइटी का मूल उद्देश्य प्राचीन भारतीय पुस्तकों का आंग्लभाषा में अनुवाद करना था। इस सोसाइटी द्वारा अनुमोदित पहली पुस्तक विलिकिंग्सन द्वारा भगवतगीता तथा दूसरी हितोपदेश एवं तीसरी जैन शाकुन्तलम थी। जिसका आंग्ल भाषा में अनुवाद विलियम जोन्स ने स्वयं किया था।
  • नन्द कुमार अभियोग (1775):- राजानन्द कुमार मुर्शिदाबाद का भूतपूर्व दीवान था। इसने हेस्टिंग्स पर आरोप लगाया कि मीर जाफर की विधवा मुन्नी बेगम ने अल्पवयस्क नवाब मुबारकउद्दौला का संरक्षक बनने के लिए वारेन हेस्टिंग्स को साढ़े तीन लाख रुपया घूस दिया। हेस्टिंग्स ने मुख्य न्यायाधीश इम्पे की मदत से नन्द कुमार को फाँसी पर लटका दिया। इस मुकदमें को न्यायिक हत्या की संज्ञा दी जाती है।
  • महाभियोग:– हेस्टिंग्स एक मात्र गर्वनर जनरल था जिस पर महाभियोग लगाया गया था। यह महाभियोग वर्क ने लगाया था परन्तु हेस्टिंग्स को बरी कर दिया गया।
  • सर जान मैक फरसन (1786) स्थानापन्न

2. कार्नवालिस (1786-93)

यही एक मात्र गर्वनर जनरल है जिसकी स्वतः मृत्यु भारत में हुई तथा गाजीपुर में समाधि बनायी गयी। इसके काल की अन्य महत्वपूर्ण घटनाएँ निम्नलिखित हैं-

  • पुलिस सेवा का जन्मदाता:- भारत में पुलिस सेवा का जन्मदाता कार्नवालिस को माना जाता है।
  • सिविल सेवा:- भारत में सिविल सेवा का जन्मदाता कार्नवालिस था। पहली बार 1833 के अधिनियम में यह कहा गया कि क्रास्ट क्रीड और कलर के आधार पर कोई भेद-भाव नही किया जायेगा। धारा 87, परन्तु 1853 ई0 से इस सेवा में परीक्षा होने लगी। 1863 में प्रथम भारतीय I.E.S. सत्येन्द्र नाथ टैगोर थे। प्रारम्भ में इस परीक्षा की आयु 23 वर्ष थी जिसे लिटन ने घटा कर 19 वर्ष कर दिया।

सुरेन्द्र नाथ बनर्जी असम के कलक्टर पद पर रहते हुए निलम्बित कर दिये गये थे। जबकि अरबिन्द घोष घुड़सवारी परीक्षक पास नही कर पाये थे। सुभाष चन्द्र बोस ने I.E.S. परीक्षा पास करने के बावजूद अपने राजनैतिक गुरु म्ण्त्ण् क्ंे के कहने पर इस्तीफा दे दिया था। प्रारम्भ में यह परीक्षा इंग्लैण्ड में होती थी लेकिन 1923 से भारत में भी होने लगी। सिविल सेवा को इस्पात का चैखट कहा जाता है।

  • स्थायी बन्दोबस्त:- 1793 में पहले बंगाल में फिर बिहार उड़ीसा में लागू हुआ। R.E. Dutt ने स्थाई बन्दोबस्त का समर्थन किया था। क्योंकि वे स्वयं जमींदार परिवार से सम्बन्धित थे।
  • कार्नवालिस संधिता (1793):– इस कोड के द्वारा कर तथा न्याय प्रशासन को पृथक कर दिया गया। इस प्रकार यह शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धान्त पर आधारित था।
  • दास व्यापार पर रोक (1789):– कार्नवालिस ने 1789 में दासों के व्यापार पर रोक लगा दिया।

3. सर जाॅन शोर (1793-98)

जान शोर ने सुझाव दिया था कि जमींदारों के साथ भू-राजस्व बन्दोबस्त किया जाय। इसने मैसूर के प्रति अ-हस्तक्षेप की नीति अपनायी।

4. लार्ड वेलेजली (1798-1805)

1. फोर्ट विलियम कालेज की स्थापना:- इस कालेज की स्थापना I.E.S. में भर्ती किये गये युवकों के प्रशिक्षण के लिए किया गया था। परन्तु बाद में इसे बन्द कर इसकी जगह इंग्लैण्ड के हेलेवरी में प्रशिक्षण दिया जाने लगा।
2. सहायक संन्धि (1798):- भारत में अंग्रेजी श्रेष्ठता को स्थापित करने के उद्देश्य से वेलेजली ने सहायक सन्धि प्रणाली को प्रचलित किया। इस संन्धि को स्वीकार करने वाले राज्यों के वैदेशिक सम्बन्ध अंग्रेजी राज्य के अधीन हो जाते थे। परन्तु उनके आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया जाता था। इस सन्धि का मूल उद्देश्य बिना खर्च के सेना को संगठित करना तथा फ्रांसीसी भय को समाप्त करना था। निम्नलिखित राज्यों ने सन्धि पर हस्ताक्षर किये-

  1. हैदराबाद    -1798
  2.  मैसूर          -1799
  3. तन्जौर        -1799
  4. अवध          -1801
  5. पेशवा         -1802
  6. भोंसले        -1803
  7. सिन्धिया      -1804
  8. जोधपुर
  9. जयपुर
  10. भछेड़ी
  11. बूँदी
  12. भरत पुर

5. सर जार्ज वारलो (1805-07)

इसने होल्कर के साथ 1806 में राजपुर घाट की सन्धि की परन्तु मराठों के प्रति शान्तिपूर्ण नीति अपनायी, इस तरह इसे मराठों के प्रति अहस्तक्षेप की नीति को अपनाने का श्रेय दिया जाता है।

6. मिण्टों प्रथम (1807-13)

इसी के समय में रणजीत सिंह के साथ 1809 में अमृतसर की प्रसिद्ध सन्धि की गयी, इस सन्धि पर अंग्रेजों की तरफ से हस्ताक्षर मेटकाॅफ ने किया, जबकि सिक्खों की तरफ से रणजीत सिंह ने।

7. लार्ड हेस्टिंग्स (1813-23)

इसका काल ब्रिटिश सर्वोच्चता का काल माना जाता है, इसी समय ब्रिटिश प्रभुसत्ता भारत पर पूर्ण रूप से स्थापित हो गयी, इसके काल की प्रमुख घटना निम्नलिखित है-

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